चंद्रयान-3: सफल होने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की दृष्टि सूर्य की ओर है

By Shweta Soni

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नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है | इस लेख में, हम चरण-3 चंद्रयान की सफलता के बाद आदित्य एल1 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) के नवाचार की बात करेंगे जिसमें उनका ध्यान सूर्य की ओर हो रहा है। हम उसके पीछे के कारणों को जानेंगे और इस नए प्रकल्प “आदित्य एल1” के बारे में भी चर्चा करेंगे।

परिप्रेक्ष्य

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने चंद्रयान-2 मिशन के बाद एक बड़े प्रयास के तहत चंद्रयान-3 को शुरू किया था। इस मिशन का उद्देश्य पहले की तरह चंद्रमा की सतह की जांच करना है, लेकिन इस बार इसकी दृष्टि सूर्य की ओर हो रही है।

चंद्रयान-3: सफल होने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की दृष्टि सूर्य की ओर है

आदित्य एल1: सूर्य की ओर एक नया कदम

आदित्य एल1 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का एक नया प्रोजेक्ट है जिसका उद्देश्य सूर्य के निकट जाकर उसकी वायुमंडलीय प्रक्रियाओं को अध्ययन करना है। इसका मुख्य लक्ष्य है कि वैज्ञानिकों को सूर्य की तापमान, उसके उपग्रहों का आकार, और उसकी अन्य वायुमंडलीय प्रक्रियाओं की जानकारी मिले।

सूरज पर पहुंचने की तैयारी

दोस्तों चांद को छूने के बाद अब इसरो सूरज पर फतह करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए आने वाले कुछ ही वक्त में ADITYA-L1 मिशन को लॉन्च किया जाएगा. इसमें ISRO सूरज के कोरोनल मास इजेक्शन को स्टडी किया जाएगा. यानी इस मिशन के जरिए सूरज से निकलने वाली आग की लपटों पर रिसर्च की जाएगी. 

ADITYA-L1 का मिशन का मकसद क्या है

इस प्रोजेक्ट का प्रमुख उद्देश्य है वैज्ञानिकों को सूर्य की तापमान और उसके वायुमंडलीय प्रक्रियाओं की गहराईयों तक जानकारी प्रदान करना जो हमारे विज्ञानिक अध्ययनों को और भी महत्वपूर्ण बना सकती है।

इसरो की वेबसाइट पर इस मिशन को लेकर जानकारी दी गई है. जिसमें बताया गया है कि सूरज पर होने वाले अलग-अलग रिएक्शन के चलते अचानक ज्यादा एनर्जी रिलीज होती है, जिसे कोरोनल मास इजेक्शन कहते हैं. जिसका तमाम सैटेलाइट्स पर भी असर पड़ता है. अब सवाल है कि आग की लपटों से भरे सूरज के नजदीक कैसे किसी सैटेलाइट को फिट किया जाएगा. इसका उत्तर भी सैटेलाइट के नाम में ही छिपा है. 

सैटेलाइट के लिए सबसे सेफ प्वाइंट

दोस्तों सैटेलाइट इस एल1 कक्षा के आगे नहीं जा सकती है, क्योंकि अगर इसे पार किया तो देखते ही देखते सूरज इसे निगल जाएगा. यानी इसी प्वाइंट पर रहकर ADITYA-L1 सूरज को स्टडी करेगा. इसरो ने वेबसाइट पर बताया है कि आदित्य एल1 पेलोड के सूट कोरोनल हीटिंग, कोरोनल मास इजेक्शन, प्री-फ्लेयर और उनकी विशेषताओं, अंतरिक्ष मौसम की गतिशीलता, कण और क्षेत्रों के प्रसार आदि की समस्या को समझने के लिए सबसे जरूरी जानकारी देगा.

ADITYA-L1 में अलग-अलग कुल सात पेलोड होंगे. जो सूरज से आने वाली किरणों की जांच करेंगे. इसमें हाई डेफिनेशन कैमरे भी लगे होंगे. चार पेलोड सूरज की रिमोट सेंसिंग करेंगे और बाकी तीन इन-सीटू ऑब्जर्वेशन के काम में लगेंगे.

चंद्रयान-3: सफल होने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की दृष्टि सूर्य की ओर है

विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम

आदित्य एल1 का मिशन विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह हमें सूर्य के निकट जाकर उसकी प्रक्रियाओं को समझने में मदद करेगा और हमारे वैज्ञानिक समुदाय को नई जानकारी प्राप्त करने में सहायक होगा।

समापन

इस नए प्रोजेक्ट “आदित्य एल1” के माध्यम से, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने एक बड़े उद्देश्य की ओर कदम बढ़ाया है। सूर्य के निकट जाकर उसकी वायुमंडलीय प्रक्रियाओं को समझने का यह प्रयास विज्ञान की नई ऊँचाइयों की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।

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