सावन कानवर यात्रा 2023: भगवान शिव को आनंदित करने के लिए पहले कानवारिया कौन थे?

By Shweta Soni

Published on:

WhatsApp Group (Join Now) Join Now
Telegram Group (Join Now) Join Now

हेलो दोस्तों,

मै श्वेता और आप सभी का मेरे वेबसाइट chudailkikahani.com में स्वागत है। आज मै आप सभी के लिए सावन कानवर यात्रा 2023 : भगवान शिव को आनंदित करने के लिए पहले कानवारिया कौन थे? कहानी लेके आई हु। इस साल 4 जुलाई 2023 से शिव जी के प्रिय माह सावन की शुरुआत हो रही है। सावन का महीना शुरू होते ही कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है। सावन के महीने में पूरे उत्तर भारत और अन्य राज्यों से कांवड़िये किसी पवित्र धाम जाते हैं और वहां से गंगाजल लाकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं।

कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों को सैकड़ों किलोमीटर दूर तक नंगे पैर ही चलना होता है। यात्रा के दौरान कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता है। यात्रा के दौरान शिव भक्त अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए गंगा जल लाते हैं और उससे भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आखिर कांवड़ यात्रा की शुरुआत कब से हुई या पहला कांवड़िया कौन था? तो चलिए हम आपको बताते हैं पहले कांवड़िये का नाम और इससे जुड़ी दिलचस्प कथा…

सावन कानवर यात्रा 2023: भगवान शिव को आनंदित करने के लिए पहले कानवारिया कौन थे?

यात्रा और उनका महत्व

भारतीय साहित्य, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में कानवर यात्रा का विशेष महत्व है। यह एक धार्मिक यात्रा है जो सभी शिव भक्तों के लिए महत्वपूर्ण होती है। सावन कानवर यात्रा भारत के अधिकांश राज्यों में हर साल आयोजित की जाती है और इसमें हजारों शिव भक्त भाग लेते हैं। इस लेख में, हम जानेंगे कि सावन कानवर यात्रा की शुरुआत किसने की थी और यह कैसे महत्वपूर्ण हो गई है।

यात्रा की शुरुआत का इतिहास

सावन कानवर यात्रा की शुरुआत का इतिहास विचारशीलता और भक्ति के गहरे संगम पर आधारित है। यह यात्रा पुरानी पौराणिक कथाओं और शास्त्रों के अनुसार महादेव भगवान के श्रद्धालुओं द्वारा पूरी तीर्थ यात्रा के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुकी है। यह यात्रा भारतीय धार्मिक संस्कृति का अटूट हिस्सा है और शिव भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है।

सावन मास में कानवर यात्रा

सावन कानवर यात्रा विशेष रूप से सावन मास में आयोजित की जाती है। यह यात्रा हिंदू पंचांग के आठवें मास में संपादित होती है और मुख्य रूप से शिवरात्रि से लेकर रक्षाबंधन तक चलती है। इस मास में, कानवरियों को भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का अद्वितीय अवसर मिलता है। कानवरियाँ अपने मन-वचन-कर्म से उनकी प्रसन्नता को प्राप्त करने का निर्णय लेते हैं और भक्ति और समर्पण के साथ यात्रा पूरी करते हैं।

सावन कानवर यात्रा का महत्व

सावन कानवर यात्रा का महत्व विशेष रूप से शिव भक्तों के लिए होता है। यह यात्रा उन्हें भगवान शिव के द्वारा प्रीति प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। सावन मास में शिवरात्रि के पश्चात्, शिव भक्तों ने शिवलिंग पर जल, धूप, फूल और बेल पत्र चढ़ाने की परंपरा बना ली है। इसके बाद, वे अपनी कंठों पर कांवड़ लेकर यात्रा प्रारम्भ करते हैं और अपने निर्धारित स्थान तक पहुंचते हैं।

सावन कानवर यात्रा का प्रारंभ

सावन कानवर यात्रा की शुरुआत को लेकर कई कथाएं हैं, लेकिन एक प्रमुख कथा इस यात्रा की महत्ता को स्पष्ट करती है। इस कथा के अनुसार, एक बार की बात है जब देवताओं और राक्षसों के मध्य भयंकर संग्राम हुआ था। इस संग्राम में देवताओं को विजय मिली थी और उन्होंने अमृत वास्तविकता का नाम प्राप्त किया था।

इससे राक्षस राजा रावण बहुत खुश हुआ और उसने अमृत को पाने का निर्णय लिया। लेकिन जब वह अमृत पाने वाला थाली को उठा रहा था, तभी महादेव ने उसके हाथ को रोक दिया। महादेव ने कहा कि अमृत राक्षसों के हाथ में नहीं हो सकता है। यह इसलिए है कि वह दुर्गा माता की पूजा और आराधना के बिना प्राप्त नहीं हो सकता है।

सावन कानवर यात्रा के माहौल

सावन कानवर यात्रा के दौरान एक उत्साहभरा माहौल होता है। लोग संगठित ढंग से यात्रा करते हैं, मन्दिरों में शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं। यात्रा के दौरान, लोग शिवलिंग पर जल चढ़ाने के साथ-साथ भक्तिभाव से प्रणाम करते हैं और मन्त्रों का जाप करते हैं। सावन कानवर यात्रा में भाग लेने वाले लोग एकजुट होते हैं और एक-दूसरे का साथ देते हैं। इससे यात्रा में एक सामूहिक भावना व अनुभव का आभास होता है।

सावन कानवर यात्रा का महत्वपूर्ण स्थान

सावन कानवर यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण स्थानों की पर्यटन की गई है। इनमें कांवरियों के लिए खास महत्व रखने वाले कुछ स्थान हैं जैसे हरिद्वार, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ। ये स्थान सावन मास में भगवान शिव के धामों के रूप में मान्यता प्राप्त करते हैं और कानवरियों के आगमन के लिए धार्मिक एवं पौराणिक महत्त्व रखते हैं। इन स्थानों पर कानवरियों की संख्या सावन मास के दौरान अत्यधिक होती है और यहां उन्हें मान्यता से पूजा-अर्चना करने का अवसर मिलता है।

सावन कानवर यात्रा 2023: भगवान शिव को आनंदित करने के लिए पहले कानवारिया कौन थे?

सावन कानवर यात्रा का पर्याय

सावन कानवर यात्रा को विभिन्न रूपों में देश भर में मनाया जाता है। यह यात्रा पवित्र नदीओं और मंदिरों की ओर होती है और लोग शिव भक्ति में लीन होते हैं। कानवरियों की संख्या इस मासिक यात्रा के दौरान काफी बढ़ जाती है और वे अपनी आस्था और भक्ति के साथ यात्रा करते हैं। सावन कानवर यात्रा भारतीय संस्कृति और धार्मिकता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे लोग एक उत्सव के रूप में मान्यता प्रदान करते हैं।

संक्षेप में

सावन कानवर यात्रा एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जिसमें शिव भक्तों को भगवान शिव के द्वारा प्रीति प्राप्त करने का अवसर मिलता है। यह यात्रा सावन मास में आयोजित की जाती है और कानवरियों को शिवलिंग पर जल चढ़ाने और भजन-कीर्तन करने का अवसर प्रदान करती है। इस यात्रा का महत्वपूर्ण स्थान हरिद्वार, गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे पवित्र स्थलों में है। सावन कानवर यात्रा को लोग आस्था और भक्ति के साथ मान्यता प्रदान करते हैं और इसे धार्मिक उत्सव के रूप में मनाते हैं।

READ MORE :-DEVRAJ PATEL BIOGRAPHY IN HINDI |जानिए कौन था देवराज पटेल

FOR MORE :- Things Fall Apart: A Profound Exploration of Culture and Identity

HI i am Shweta Soni

Leave a Comment